Thursday, March 8, 2018

दिल्‍ली 06 की साइकिल यात्रा





दोस्‍तों साइकिलिंग (Cycling) अपने आप में एक पूरी एक्‍सरसाइज है क्‍योंकि यह आपके दिल, मांस-पेशियों को मजबूत करती है, वजन, तनाव कम करने और आपको चुस्‍त बनाने में मदद करती है।

मुझे साइकिल (cycle) चलाना बेहद पसंद है अगर मुझे मौका मिले तो दिनभर साइकिल चलाता रहूं मगर क्‍या करूं दिल्‍ली जैसे शहर साइकिल चलाने के लिए उपयुक्‍त नही हैं। यहां न साइकिल के लिए अलग ट्रैक है और ना ही लोग सड़क पर साइकिल चलाने वालों को रास्‍ता देते हैं या उनका सम्‍मान करते हैं। इसीलिए ज्‍यादातर लोग कनॉट प्‍लेस, इंडिया गेट और राष्‍ट्रपति भवन, चाणक्‍यपुरी और आस-पास के दायरे में ही साइकिल चलाते हैं मगर मुझे थोड़ा रोमांच चाहिए होता है इसलिए मैनें दिल्‍ली 06 के इलाके में जाने का प्‍लान बनाया।



दिल्‍ली 6 की स्थिति बेहद चिंताजनक है यहां हर तरफ कूड़ा-कचरा, गंदगी फैली रहती है जिसका सबसे बड़ा कारण यहां पर लोगों की भीड़ है। जो जगह 100 लोगों के रहने के लिए है वहां हजारों लोग रहते हैं।

मैं मिंटो रोड़ कॉम्‍पलेक्‍स में रहता हूं यह सरकारी कालोनी है मगर जैसे ही आप गेट से बाहर निकलते हैं तो आपका सामना अनगिनत संख्‍या में खड़े ऑटो रिक्‍शा से होता है। खैर मैं वहां से आगे तुर्कमान रोड़ पर निकला जो अतिक्रमण के कारण पूरी तरह त्रस्‍त है बदबू इतनी कि सांस लेना दूभर हो जाता है मुझे ताजुब्‍ब होता है कि लोग ऐसी स्थिति में कैसे रह सकते हैं। वहां से मैं cycling करते जीबी पन्‍त अस्‍पताल होते हुए आटीओ,  राजघाट की तरफ बढ़ा तो थोड़ी राहत महसूस हुई लेकिन बस कश्‍मीरी गेट बस अड्डा पहुंचने पर फिर से वही दृश्‍य वही अराजकता का माहौल आपका स्‍वागत करता है, पता नहीं लोगों को कैसी शिक्षा मिलती है जो वे थोड़ी सी खाली जगह मिलते ही या तो उसे गंदा करने लगेंगे या उसका अतिक्रमण कर लेंगे। बस अड्डे से तीस हजारी की तरफ cycling करते हुए भी कमोबेस यही स्थिति नजर आती है हर जगह बहुत प्रदूषण (pollution)
 है।

वहां से जैसे ही मैं पुल बंगश होते हुए आज़ाद मार्केट और वहां से आगे बढ़ते हुए नया बाजार रोड़ पर लाहौरीगेट की ओर मुड़ा तो वहां मेरा स्‍वागत मिली-जुली गंधों से हुआ वहां तरह-तरह के मसालों की खुशबू फैली हुई थी, गंदगी का तो कोई हिसाब ही नहीं था शायद लोग रात को जब दुकाने बंद करते हैं तो अपना सारा कूड़ा सड़क पर फेंक देते हैं।

यही हाल चांदनी चौक और स्‍वामी श्रृद्धानंद मार्ग का भी है, सड़कें टूटी हुई और कीचड़ तथा गंदगी से अटी पड़ी थी उसके बाद दिल्‍ली गेट आता है यहां अनेक बड़ी कंपनियों के ऑफिस है मगर लोगों का इतना दबाव है कि सब कुछ अस्‍त-व्‍यस्‍त रहता है इसके बाद जैसे ही मैं नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन की तरफ बढ़ा तो हर जगह लोगों से त्रस्‍त थी पूरे क्षेत्र में पेशाब की गंध फैली हुई थी, लोग कहीं भी शुरु हो जाते हैं उन्‍हें न किसी की फिक्र होती है और ना ही वे सब्र करना जानते है और किसी से टॉयलेट के लिए पूछना तो उनके डीएनए में है ही नहीं।

मेरी आगे साइकिलिंग करने की हिम्‍मत नहीं हुई क्‍योंकि मेरा गला धूल से भर चुका था। अगर हम लोग इसी तरह से गंदगी फैलाते रहे तो दिल्‍ली एक दिन कूड़े का ढेर बनके रह जायेगी।

ध्‍यान देने योग्‍य बातें

  • साइकिल चलाते समय हेलमेट जरुर पहनें क्‍योंकि हमारे देश में साइकिल चलाने वालों को सड़क पर उतनी अहि‍मियत नहीं दी जाती है जितनी कि अन्‍य देशों में दी जाती है।
  • अपनी साइकल पर लाइट रिफ्लेक्‍टर और ब्लिंकर लाइट्स अवश्‍य होनी चाहिए ताकि आपके पीछे से आने वाली गाड़‍ियां आपको देख सके।
  • सनग्‍लासेस और Pollution mask जरुर पहनें यह आपको बीमार होने से बचायेगा।
  • अपने साथ अपना फोन और पर्याप्‍त मात्रा में पानी रखें।

    Wednesday, January 31, 2018

    दिल्‍ली का दिल - कनॉट प्‍लेस


    अगर आप दिल्‍ली में रहते हैं या दिल्‍ली घूमने या काम से आये हैं तो आप कनॉट प्‍लेस (राजीव चौक) अवश्‍य गये होंगे। दोस्‍तों, परिवार, रिश्‍तेदारों के साथ घूमने, शॉपिंग करने व खाने-पीने की बढ़िया जगह है। अंग्रेजों ने कनॉट प्‍लेस की नींव 1929 में रखी और 1933 में यह बनकर तैयार हुआ। एक जमाने में यह जंगल हुआ करता था और आस-पास के लोग यहां शिकार खेलने आया करते थे। इसका नाम प्रिंस आर्थर, कनॉट एंड स्‍ट्रैथर्न के पहले राजकुमार के नाम पर रखा गया है, वे रानी विक्‍टोरिया के तीसरे बेटे थे, और 1921 में भारत आये थे।  
    अंग्रेज कितने दूरदर्शी थे इसका अंदाजा इसकी वास्‍तु कला से लग जाता है, आज भी यहां उस तरह की समस्‍याएं नहीं आती है जो आजादी के बाद बने अन्‍य बाजारों में होती है। हर चीज को सोच-समझकर डिजाइन किया गया है। यहां तीन सर्कल है आउटर, मिडिल और इनर सर्कल। गोलाई में बनी एक जैसी इमारतें इसे बेहद खास बनाती है।  
    आज कनॉट प्‍लेस बिजनेस, खाने-पीने, खरीददारी, सिनेमा और अच्‍छा समय बिताने की सबसे बढ़िया जगहों में से एक है, सप्‍ताह के सभी दिन यहां बड़ी चहल-पहल रहती है, मगर वीकेंड में रौनक पहले से कई गुना बढ़ जाती है। यहां सभी तबकों के लोग आते हैं चाहे वे सभ्रांत हों, हाई क्‍लास, मिडिल क्‍लास सभी आते हैं। लोग कई तरह की गतिविधियां करते हुए देखे जा सकते हैं। कोई स्‍केच बना रहा है, कोई गिटार बजा रहा है, कहीं कोई कैंपेन चल रहा होता है, कोई डिस्‍काउन्‍ट के पर्चे बांट रहा है और न जाने क्‍या-क्‍या। यहां छोटे-बड़े ढेर सारे रेस्‍त्रां और बार्स हैं अगर आप थोड़ा सा घूमेंगे तो आपको किफायती रेस्‍त्रां और बार मिल जायेगा। अक्‍सर जनपथ के सामने वाले सब-वे में पेन्टिंग्‍स और स्‍कल्‍पचर की प्रदर्शनी चलती रहती है। पी ब्‍लॉक वाले सब-वे में आपको योग से जुड़े मोजैक मिल जायेंगे और अगर आप एन ब्‍लॉक वाले यानि सिंधिया हाउस वाले सबवे को इस्‍तेमाल करेंगे तो वहां आपको दीवारों पर सूर्य नमस्‍कार और योग की अन्‍य मुद्राओं के मोजेक चित्र नजर आयेंगे मगर दुख की बात है कि लोग सब-वे का इस्‍तेमाल करना पसंद ही नहीं करते हैं उन्‍हें तो एडवेंचर पसंद है, वे अपना जादुई हाथ लहराते हुए ट्रैफिक के सामने से पार करते हुए दूसरी तरफ जाते हैं।

    चार धामों में से एक बद्रीनाथ के बारे में जानने के लिए क्लिक करें

    खूबसूरत सेंट्रल पार्क सभी लोगों की पसंदीदा जगहों में से एक है खासकर युवाओं की, यहां पर एक एंफी-थिएटर भी है, यहां गांधी जी का चरखा और छोटा सा म्‍यूजियम भी है। सेंट्रल पार्क की एक और खास बात है यहां लहराता भारतीय तिरंगा जिसकी ऊंचाई 63 मीटर है और झंडे की ऊंचाई 18 मीटर और चौड़ाई 27 मीटर है।

    खरीददारी

    पालिका बाजार काफी लोकप्रिय है जिसे 1970 में बनाया गया था, यहां से आप कपड़े, महिलाओं की एक्‍सेसरीज आदि कई चीजों की खरीददारी कर सकते हैं, इसके अलावा जीवन भारती बिल्डिंग के पीछे का जनपथ मार्केट भी काफी लोकप्रिय है। आउटर सर्कल पर भी पटरी मार्केट लगता है, जहां से सस्‍ते दामों पर चीजें खरीदी जा सकती हैं।

    सिनेमा

    यहां पर चार सिनेमा हॉल जिनमें से एक रीगल प्‍लाजा बंद हो चुका है यह दिल्‍ली का सबसे पुराना सिनेमा हॉल था, जो कभी बहुत मशहूर हुआ करता था इसमें अमीर लोग ही जा सकते थे। सिनेमा के यहां यहां कसर्ट, नाटक, बैले डांस आदि कार्यक्रम भी आयोजित हुआ करते थे। 1 दिसंबर से इसमें मैडम तुसाड म्‍यूजियम खुल गया है शायद आपको पता होगा कि मैडम तुसाड म्‍यूजियम में सेलिब्रिटीज के असली जैसे दिखने वाले पुतले लगाये जाते हैं। रिवोली सिनेमा आउटर सर्कल पर शिवाजी स्‍टेडियम बस टर्मिनल के पीछे है, प्‍लाजा मिडिल लेन में और ओडियन सी ब्‍लॉक में आउटर सर्कल पर है।
    खाना पीना
    खाने-पीने की जगहों की यहां पर कोई कमी नहीं है चाहे आपको स्‍ट्रीट फूड खाना हो या फाइन डाइन में जाना हो या किसी बार में ड्रिंक्‍स का आनंद लेना हो, आपके पास ढेरों विकल्‍प हैं, यहां हर ब्‍लॉक में कई रेस्‍टोरेंट बार हैं, वीकेंड्स पर तो यहां गजब भीड़-भाड़ होती है, पार्किंग मिलना मुश्किल होता है। यहां अंग्रेजों के जमाने में खुला युनाइटेड कॉफी हॉउस आज भी चल रहा है।
    आस-पास
    कनॉट प्‍लेस के आस-पास जनपथ, जंतर-मंतर, हनुमान मंदिर, उग्रसेन की बावली, राष्‍ट्रपति भवन, इंडिया गेट, मंडी हाउस, बंगाली मार्केट, बंगला साहिब गुरुद्वारा, अशोक रोड़ पर बना कैथेड्रल चर्च, गोल डाकखाना, नई दिल्‍ली रेलवे स्‍टेशन, शिवाजी स्‍टेडियम, राजीव चौक मेट्रो स्‍टेशन, पहाड़ गंज, झंडेवाला मंदिर इत्‍यादि अनेक स्‍थान हैं जहां आप जा सकते हैं।
    कैसे पहुंचे
    दिल्‍ली और एनसीआर में कहीं से भी यहां मेट्रो के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है, रेल से नई दिल्‍ली तक और आगे या तो पैदल या रिक्‍शा से, बसें भी लगभग सभी हिस्‍सों से यहां आती है। रुकने के लिए तो अनेकों विकल्‍प हैं आप पहाड़गंज में रुक सकते हैं वहां सस्‍ते से लेकर महंगे तक सभी विकल्‍प हैं।

    अवश्‍य पधारें मगर स्‍वच्‍छता का ध्‍यान रखें।